Sunday, 29 December 2013

परमात्मा का रहस्य ...........भाग ३

सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम्। 
असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च।।

परमात्मा समस्त इन्द्रियों के मूल स्रोत हैं , फिर भी वे इन्द्रियों से रहित हैं।  वे समस्त जीवों के पालनकर्ता होकर भी अनासक्त हैं। वे प्रकृति के गुणों से परे हैं , फिर भी वे भौतिक प्रकृति के समस्त गुणों के स्वामी हैं। 

Although that supreme principle is the illuminator of all the senses and their objects, He is devoid of material senses; although completely aloof, He is the maintainer of all (in the form of Lord Visnu); and although transcendental to the three modes of material nature, He is servable by that modal nature. 

No comments:

Post a Comment