Thursday, 26 December 2013

प्रकृति के तीन गुण भाग ७

सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत। 
ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जयत्युत।।

हे भरतपुत्र ! सतोगुण मनुष्य को सुख से बाँधता है , रजोगुण सकाम कर्म से बाँधता है और तमोगुण मनुष्य के ज्ञान को ढक कर उसे पागलपन से बाँधता है। 

O Arjuna, goodness conditions the soul to happiness, and passion conditions him to action. But the mode of ignorance, covering the living being's knowledge, conditions him to indolence, slothfulness, and slumber. 

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